Tue, 16 Jun 2026
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मिथिला के मूलभूत सवालों से हर बार मुंह मोड़ते हैं पीएम मोदी: राजेश राठौड़*

*हर बार अनुत्तरित रह जाते हैं मिथिलांचल के मूलभूत सवाल, पीएम दे जवाब: राजेश राठौड़*


*पटना. शनिवार, 4 मई, 2024* (विक्रांत मदान) : 


बिहार के दरभंगा पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने कड़े सवाल किए हैं।
उन्होंने पूछा है कि प्रधानमंत्री को अपने जनसभा में यह बताना चाहिए कि आखिर दरभंगा एम्स का निर्माण पर प्रधानमन्त्री मौन क्यों हैं? साथ ही उन्होंने सवाल किया कि मोदी सरकार कोसी और बागमती नदी की बाढ़ नियंत्रण पर क्या काम किया गया और मैथिली भाषा की उपेक्षा पर प्रधानमंत्री ने क्या किया?

बिहार कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कहा कि दरभंगा में एम्स की स्थापना  ऐसा वादा है जिसे पीएम मोदी भूल गए हैं। 2020 में मंजूरी मिलने के बाद से स्थानीय लोग 2,100 बिस्तरों वाले अस्पताल का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है। हाल ही में, स्वास्थ्य मंत्रालय ने अंततः एक कमिटी को नियुक्त किया जो इस अस्पताल को डिज़ाइन करेगी। दरअसल ऐसा करना महज़ मतदाताओं को यह दिखाने के लिए है कि उन्होंने लोकसभा चुनावों से पहले कुछ प्रगति की है। यह परियोजना इतने लंबे समय तक क्यों रुकी हुई है? साथ ही पिछले 20 वर्षों में, भाजपा ने मैथिली भाषा के विकास, संरक्षण या इसके प्रचार-प्रसार के लिए कुछ नहीं किया है। यह संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है। वर्ष 1968 में राजभाषा संकल्प ने केंद्र और राज्यों को अनुसूचित भाषाओं के "पूर्ण विकास" के लिए "ठोस उपाय" करने के लिए बाध्य किया था, ताकि वे तेजी से समृद्धि हों और आधुनिक ज्ञान के संचार का प्रभावी साधन बनें। भाजपा ने केंद्र में अपने 10 साल और बिहार में 13 साल के शासन काल के दौरान इस संकल्प की पूरी तरह से अवहेलना की है। उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों में इस भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने से इंकार कर दिया है। राज्य की मैथिली अकादमी एक भूतिया संगठन में तब्दील होकर रह गई है, जिसके पास वर्षों से न तो कोई धन है, न कोई अध्यक्ष है और न ही कोई कर्मचारी या प्रकाशन है। प्रधानमंत्री और भाजपा ने इस भाषा की उपेक्षा क्यों की? 
साथ ही उन्होंने सबसे अहम सवाल किया कि हर मानसून में, कोसी, बागमती, और कमला बालन नदी बाढ़ से इस इलाके में तबाही लाती है। भाजपा के पसंदीदा ठेकेदारों को हर बार तटबंध के पुनर्निर्माण के लिए कॉन्ट्रैक्ट मिलते हैं। भाजपा और जदयू की सरकार इस समस्या के समाधान के लिए कोई प्रयास किए बिना, बैराज गेट खोलने के लिए नेपाल को दोषी ठहराना पसंद करती है। मोदी सरकार लाखों बाढ़ पीड़ितों की दुर्दशा को नजरअंदाज क्यों कर रही है? क्या मिथिलांचल और कोसी में लोगों की दुर्दशा भाजपा के लिए लाभ कमाने का एक और अवसर बनकर रह गई है? उन्होंने कहा कि अगली बार जब भी बिहार में चुनावी लाभ को जनसभा करने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आयेंगे तो इन अनुत्तरित सवालों के जवाब भी लेकर जरूर आएं।

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