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पीएम और वित्त मंत्री बताएं बिहार में औद्योगिक विकास ठप क्यों: राजेश राठौड़
*अपनी सरकार की उपलब्धियां भी नहीं गिना पाएं मोदी: राजेश राठौड़*
पटना. मंगलवार, 21 मई, 2024 (विक्रांत मदान) :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार के मोतिहारी दौरे पर दिए गए बयानों पर कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि चंपारण महात्मा गांधी की कर्मभूमि रही है और आज वहां गोडसे की संस्कृति के पोषक ने झूठ और तथ्यहीन बातें कहकर गोडसे की परंपरा को जीवित करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के पास बिहार के विकास और चंपारण के विकास के लिए कोई योजना या कोई नीति नजर नहीं आती है वें केवल चुनावी लाभ को बार बार तथ्यहीन बातों को हर जनसभा में दोहराते नजर आ रहे हैं। उनके भाषण नीरस और उबाऊ हो चुके हैं जो उनको जनता से मिले फीडबैक के कारण है जिसमें उनकी हार तय हो चुकी है। कभी प्रधानमंत्री अपने दस वर्षों की उपलब्धियों पर भी चर्चा करें क्योंकि देश मंदिर मस्जिद और गाय भैंस से आगे जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न तो अपनी सरकार की वर्तमान उपलब्धियां ही गिना पा रहे हैं और न ही आगामी योजनाओं पर ही चर्चा कर रहे हैं वें अब भी पुरानी बातों को ही दोहरा कर वोट अपील करते नजर आ रहे हैं।
बिहार कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कहा कि बिहार में युवा नौकरी मांग रहे हैं, किसान एमएसपी मांग रहे हैं, महिलाएं सामाजिक सुरक्षा मांग रही है और मजदूर अपने गृह राज्य में रोजगार मांग रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री केवल बिहार में वोट मांग रहे हैं जो खुद ही बताने को काफी है कि उनकी नीति केवल यहां से चुनावी लाभ है वें बिहार के विकास को काम नहीं करना चाहते हैं। बिहार में आकर वें जिस तरीके से विपक्ष के नेताओं पर आरोप लगाते हैं अब इन सब बातों से आगे निकलकर उद्योगों के विकास पर भी उनको बोलने की जरूरत है। भरी दुपहरिया में जनता उनके भाषणों को सुन नहीं पा रही है और खुद को पाक साफ बताने के लिए वें वैचारिक विरोधियों को भ्रष्ट बताने के लिए तथ्यहीन आंकड़ों के माध्यम से जनता के बीच झूठ बोलने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बताएं कि आखिर चैंबर ऑफ कॉमर्स में बिहार में उद्योगों के विकास के लिए कितनी चर्चा करती हैं और बिहार में औद्योगिक विकास के लिए कितना सरकारी फंड मुहैया कराती हैं। चूंकि प्रधानमन्त्री के नीतियों में बिहार के प्रति उदासीनता है इसलिए इनके मंत्री भी बिहार के विकास को दरकिनार करते हैं।
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