ਨਾਗਰਾ ਫਾਟਕ ਤੋਂ ਰਤਨ ਨਗਰ ਦੇ ਰਸਤੇ ਤੇ ਲਾਈਟਾਂ ਦੋ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਖਰਾਬ ਹੋਈਆਂ ਹਨ : ਰਣਜੀਤ ਕੌਰ ਰਾਣੋ
*एहसास*
अपनी हालत का
ख़ुद एहसास नहीं मुझ को,
मैं ने औरों से सुना है
कि परेशान हूँ मैं।
हंसते चेहरों के पीछे
छुपा हूं उदास सा ,
शायद सुकून की
तलाश में हूँ मैं।
दिल की उलझनों का
अब हिसाब कौन रखे,
कभी ख़ुद से
तो कभी ज़माने से बेनियाज़ हूँ मैं।
दिखने में सब ठीक है,
पर अंदर से टूट गया हूं मैं ,
अपने ही ख़यालों में खोया ,
हकीकत से अंजान हूँ मैं।
खुद को समझने की चाह में
भटकता हूं हर रोज,
अब अपने ही सवालों से
परेशान हूँ मैं।
शायद कभी मिले कोई जवाब
मेरी परेशानियों का,
वरना खुद की तलाश में
यूं ही गुमनाम हूँ मैं।
*कंचन "श्रुता"*????





Comments
No comments yet.