Fri, 31 Jul 2026
G2M देता है आप को स्वतंत्र पत्रकारिता का सुनहरा मौक़ा, बह भी विना किसी शुल्क के। G2M देता है आप को स्वतंत्र पत्रकारिता का सुनहरा मौक़ा, बह भी विना किसी शुल्क के।
Post Details

जज़्बात

 

दिल के कोने में जज़्बात जलते रहे,  
बेवजह, बेसबब सुलगता रहे ।  
कभी हँसी में छुपकर मुस्काए ,  
कभी खामोशियों में पिघलते रहे ।  

मैंने चाहा कि लफ्ज़ों में ढाल लूँ,  
इन्हें कोई शक्ल, कोई नाम दूँ।  
पर ये बेज़ुबान, 
हर दफ़ा मेरी सोच से फिसलते रहे।  

शायद यही है मिज़ाज इनका ,  
हर दर्द को ज़िंदा रखते हैं।  
जज़्बात नहीं, ये शोले हैं,  
जो हर हाल में जलते रहते हैं।  


*कंचन "श्रुता"*

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 188467