Sun, 14 Jun 2026
Post Details

तू हर इक का है और किसी का नहीं

तू हर इक का है और किसी का नहीं

लोग कहते रहें हमारा चाँद

अतहर नादिर

 

पलट के आ गई ख़ेमे की सम्त प्यास मिरी

फटे हुए थे सभी बादलों के मश्कीज़े

मोहसिन नक़वी

 

सौ बार टूटने पे भी हारा नहीं हूँ मैं

मिट्टी का इक चराग़ हूँ तारा नहीं हूँ मैं

ज़ीशान नियाज़ी

 

फैलते हुए शहरो अपनी वहशतें रोको

मेरे घर के आँगन पर आसमान रहने दो

अज़रा नक़वी

 

कुछ नज़र आता नहीं उस के तसव्वुर के सिवा

हसरत-ए-दीदार ने आँखों को अंधा कर दिया

 हैदर अली आतिश

 

पेड़ों को छोड़ कर जो उड़े उन का ज़िक्र क्या,

पाले हुए भी ग़ैर की छत पर उतर गए..!

शीन काफ़ निज़ाम

 

पूरा करेंगे होली में क्या वादा-ए-विसाल

जिन को अभी बसंत की ऐ दिल ख़बर नहीं

कल्ब-ए-हुसैन नादिर

 

पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा

कितना आसान था इलाज मिरा

फ़हमी बदायूनी

Views: 106

Comments & Discussions

Be the first to comment on this article!



Latest News

Number of Visitors - 166586