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पंजाब में भले ही बारिश रुक गई है और हालात दोबारा से सामान्य हो रहे हैं। पर सतलुज नदी के बहाव के कारण अभी भी गांवों पर सकंट के बादल छाए हुए है। लगातार टूटते धुसी बांध की वजह से जालंधर के मंडाला छन्ना गांव में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल, ड्रेनेज विभाग, फौज और इलाके के लोग जुटे हुए हैं।
नदी का बहाव बदलने के कारण बढ़ा खतरा
मंडाला छन्ना गांव में सतलुज नदी के किनारे धुसी बांध को बचाने के लिए राजसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल, ड्रेनेज विभाग, फौज और आम लोग जुट गए हैं। नदी का बहाव बदलने की वजह से सतलुज धुंसी बांध के बिल्कुल पास बहने लगा है। हालांकि बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं। फिर भी इस इलाके के लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। क्योंकि साल 2023 में भी यहीं से बांध टूटा था।
संत सीचेवाल बांध को मजबूत बनाने में लगे
इस बांध के टूटने से जहां जालंधर को भारी नुकसान हुआ था, वहीं कपूरथला के सुल्तानपुर लोधी क्षेत्र भी इसकी चपेट में आ गया था। अब फिर से नदी का बहाव बदलने से इस क्षेत्र के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई दे रही हैं। वहीं अब संत सींचेवाल की मौजूदगी में बांध को टूटने रोकने के प्रयास किए जा रहे है।
संत सींचेवाल ने कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के कारण बाढ़ का खतरा कम हो जाता था, लेकिन इस बार सतलुज के पानी ने रास्ता बदल लिया है। जिसके चलते दो रास्ते बेईं और दरिया की ओर पानी बह रहा है। ऐसे में पानी को रोकने के लिए बांध को टूटने से बचाने का काम किया जा रहा है।
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