Thu, 04 Jun 2026
Post Details

आर्थिक संकट की आहट? रुपया 90 के पार, बाजार में दहशत का माहौल

भारतीय मुद्रा 'रुपया' आज यानी 3 दिसंबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time Low) पर पहुंच गया है। बाजार में भारी दबाव के चलते रुपए ने 90 का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया है। सुबह शेयर बाजार खुलने के साथ ही रुपए में 9 पैसे की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के साथ रुपया 90.05 के स्तर पर ओपन हुआ। इससे पहले मंगलवार को कारोबारी सत्र के अंत में रुपया 89.96 के स्तर पर बंद हुआ था।

विदेशी फंड्स की निकासी से बढ़ा दबाव
रुपए में इस रिकॉर्ड गिरावट का मुख्य कारण विदेशी फंड्स की लगातार हो रही निकासी (Foreign Fund Outflows) को माना जा रहा है। विदेशी निवेशकों द्वारा बाजार से पैसा निकालने के कारण भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में अब तक रुपया 5.16% कमजोर हो चुका है। 1 जनवरी को डॉलर के मुकाबले रुपया 85.70 के स्तर पर था, जो अब लुढ़क कर 90.05 के लेवल पर आ गया है।

इम्पोर्ट और विदेश यात्रा होगी महंगी
रुपए में गिरावट का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ता है। रुपए के कमजोर होने का मतलब है कि भारत के लिए विदेशों से चीजों का आयात (Import) करना महंगा हो जाएगा। जब आयात महंगा होगा, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, विदेश में छुट्टियां मनाना (Travel) भी अब पहले के मुकाबले महंगा पड़ेगा।

गणित से समझिए गिरावट का असर
इसे एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए जब डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू 50 थी, तब अमेरिका में भारतीय छात्रों को 1 डॉलर खरीदने के लिए 50 रुपए खर्च करने पड़ते थे। लेकिन मौजूदा रेट (90.05) के हिसाब से अब उसी 1 डॉलर के लिए छात्रों को 90.05 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। यानी हर डॉलर पर उन्हें अब करीब 40 रुपए ज्यादा चुकाने होंगे, जिससे उनका पूरा बजट बिगड़ जाएगा।

Views: 55

Comments & Discussions

Be the first to comment on this article!



Latest News

Number of Visitors - 164672