Thu, 30 Jul 2026
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काव्य संकलन "श्रुता"

माना कि तू ज़हीन भी है ख़ूब-रू भी है
तुझ सा न मैं हुआ तो भला क्या बुरा हुआ

मोहम्मद अल्वी

देखा न होगा तू ने मगर इंतिज़ार में
चलते हुए समय को ठहरते हुए भी देख

मोहम्मद अल्वी

दौलत से मोहब्बत तो नहीं थी मुझे लेकिन
बच्चों ने खिलौनों की तरफ़ देख लिया था

मुनव्वर राना

हर चेहरे में आता है नज़र एक ही चेहरा
लगता है कोई मेरी नज़र बाँधे हुए है

मुनव्वर राना

Comments

Vikrant Madaan01 Apr 2024 05:57pm

Good collection

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