ਨਾਗਰਾ ਫਾਟਕ ਤੋਂ ਰਤਨ ਨਗਰ ਦੇ ਰਸਤੇ ਤੇ ਲਾਈਟਾਂ ਦੋ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਖਰਾਬ ਹੋਈਆਂ ਹਨ : ਰਣਜੀਤ ਕੌਰ ਰਾਣੋ
मोहब्बतों के दिनों की यही ख़राबी है
ये रूठ जाएँ तो फिर लौट कर नहीं आते
वसीम बरेलवी
मिलने की तरह मुझसे वो पल भर नही मिलता
दिल उस से मिला जिस से मुक़द्दर नही मिलता
नसीर तुराबी
मिले थे जो हमें ये कांच के बदन
कमाल है कि इतने रोज़ चल गए
शारिक़ कैफ़ी
ज़िंदगी क्या एक सन्नाटा था पिछली रात का
शमएँ गुल होती रहीं दिल से धुआँ उठता रहा...
अख़्तर सईद ख़ान





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