Thu, 30 Jul 2026
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काव्य संकलन "श्रुता"

पानी में भी चाँद सितारे उग आते हैं

आँख से दिल तक वो ज़रख़ेज़ी हो जाती है

हैदर क़ुरैशी

 

एक दरिया से कर लिया है इश्क़

और हमें तैरना नहीं आता.

-लियाक़त जाफ़री

 

थकन बहुत थी मगर साया-ए-शजर में 'जमाल'

मैं बैठता तो मिरा हम-सफ़र चला जाता

जमाल एहसानी

 

उस इक दिए से हुए किस क़दर दिए रौशन

वो इक दिया जो कभी बाम-ओ-दर में तन्हा था

उमर अंसारी

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