ਨਾਗਰਾ ਫਾਟਕ ਤੋਂ ਰਤਨ ਨਗਰ ਦੇ ਰਸਤੇ ਤੇ ਲਾਈਟਾਂ ਦੋ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਖਰਾਬ ਹੋਈਆਂ ਹਨ : ਰਣਜੀਤ ਕੌਰ ਰਾਣੋ
इकबाल अशहर जी के यह कुछ शेर .. उन्होंने कितनी खूबसूरती से शेरों को अपने शब्दों में पिरोया है । जो की कुछ इस तरह है :-
यही जुनून यही एक ख्वाब मेरा है
वहां चिराग जला दूं जहां अंधेरा है
दुनिया एक सराय है तो फिर यह रिश्तेदारी क्यों
खुशियां बांटने निकले हो तो अपना क्या बेगाना क्या
आई नो को बदल सको ना अगर
पत्थरों को तो मोम कर जाओ ।
दिल पर लगी जो ठेस कभी टूट जाएंगे
पत्थर है क्या जो आंख से आंसू ना आएंगे
हमें मिट्टी की खुशबू से जुदा होना नहीं आता
जरा सी बात पर मन से खफा होना नहीं आता
प्यास के बेदर होने का कोई रास्ता न था
इस तरफ़ बादल नहीं थे उसे तरफ़ दरिया ना था





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