Thu, 30 Jul 2026
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मंतर विग्यान

मंत्र 3 प्रकार के होते हैं...

1... जो यंत्र वादी लोग हैं ...जो यंत्र प्रयोग करते हैं, ...उसके भी मंत्र होते हैं ...यंत्र के लिए जो मित्रों की रचना वो सब रजोगुणी मंत्र है... इसमें प्रवृत्ति बहुत करनी पड़ेगी आपको...ये करो...ये  करो... ज़रा चुके तो दोष!

2... और तंत्र के जो मंत्र हैं... वो तमोगुणी है सब... आक्रमक... तमोगुणी आदमी... तांत्रिक मंत्र वाले आदमी के चेहरे पर मुस्कुराहट नहीं होगी..
. तुम डरोगे.... 

3...इसलिए  सत्व मंत्र को ग्रहण करें...हे हरि... हे राम...हे कृष्ण...हे महादेव... माँ ...गणेश... हनुमान जी... ये सब सत्व प्रधान मंत्र है....
सात्विक मंत्रों में भी राम... कृष्ण और शिव...ये  तीनों और ॐ ...ये गुणातीत मंत्र है...
शिव ना रजोगुणी ...ना तमोगुणी...ना सत्वोगुणी .... राम ना रजोगुणी ...ना तमोगुणी ...
ना सत्वोगुणी.... माँ दुर्गा का कोई नाम ...
ना रजोगुणी... ना तमोगुणी.... ना सत्वगुणी....
ये गुणातीत... ऐसे मंत्र का आश्रय करना... 

तंत्र परक मंत्र में एक विभीषिका पैदा हो जाती है... एक भीषणता ...एक आक्रमकता... डर लगे इससे बात करना ...देखना भी तकलीफ हो जाए.... 
रजोगुणी मंत्र इतना प्रवृत्ति में हमें डाल देते हैं.
जप राम .ॐ
पूजा जैन की डायरी से. 9878995575,

 

 
 

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