Thu, 30 Jul 2026
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भगवत् गीता में क्रोध की गति, दिशा और परिणाम का वर्णन : योगिराज रमेश

मनुष्य खुद अपना ही का नाश कर बैठता है...

श्री कृष्ण का भगवत् गीता में बताया की क्रोध मनुष्य का कैसा नाश करता है 

क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥


क्रोध से मनुष्य की मति-बुदि्ध मारी जाती है यानी मूढ़ हो जाती है, कुंद हो जाती है। इससे स्मृति भ्रमित हो जाती है। स्मृति-भ्रम हो जाने से मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि का नाश हो जाने पर मनुष्य खुद अपना ही का नाश कर बैठता है।,
(श्रीमद् भागवत गीता से भगवान कृष्ण का संदेश।)

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