Thu, 30 Jul 2026
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 वृद्धावस्था बाघिन की तरह गुर्राती-सी सामने खड़ी है, फिर भी जनसमूह अहितकर कार्यों में सलघन है : योगिराज रमेश जी

आनंदकंद नंदनंदन सच्चिदानंद लीला पुरुषोत्तम श्री कृष्ण चंद्र भगवान हमें सद् मार्ग पर चलने की शक्ति दीजिए आज यही प्रार्थना है।????


व्याघ्रीव तिष्ठति जरा परितर्जयन्ती
रोगाश्च शत्रव इव परिहरन्ति देहम् ।
आयुः परिस्रवति भिन्नघटादिवाम्भो
लोकस्तथाप्यहितमाचरतीति चित्रम् ।।

 वृद्धावस्था बाघिन की तरह गुर्राती-सी सामने खड़ी है, शत्रुओं की भांति रोग शरीर पर प्रहार किये जा रहे हैं, दरार वाले फूटे घड़े से चू रहे पानी की तरह आयु-क्षरण हो रहा है, फिर भी यह संसार (जनसमूह) अहितकर कार्यों में संलग्न रहता है इस तथ्य का ज्ञान मेरे लिए वास्तव में विचित्र है ।

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