ਨਾਗਰਾ ਫਾਟਕ ਤੋਂ ਰਤਨ ਨਗਰ ਦੇ ਰਸਤੇ ਤੇ ਲਾਈਟਾਂ ਦੋ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਖਰਾਬ ਹੋਈਆਂ ਹਨ : ਰਣਜੀਤ ਕੌਰ ਰਾਣੋ
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगा:।”
केवल इच्छा करने मात्र से किसी व्यक्ति के काम पूरे नहीं होते, बल्कि इसके लिए मेहनत भी करनी पड़ती है सोते हुए शेर के मुख में मॄग ,हिरण प्रवेश नही करता सिंह को उसे पाने के लिए परिश्रम करना होगा।





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