Thu, 30 Jul 2026
Post Details

काव्य संकलन "श्रुता"

उसे हम पर तो देते हैं मगर उड़ने नहीं देते

हमारी बेटी बुलबुल है मगर पिंजरे में रहती है

रहमान मुसव्विर

 

तुम्हारा दिल मिरे दिल के बराबर हो नहीं सकता

वो शीशा हो नहीं सकता ये पत्थर हो नहीं सकता

दाग़ देहलवी

 

वो चाँद है तो अक्स भी पानी में आएगा

किरदार ख़ुद उभर के कहानी में आएगा

इक़बाल साजिद

 

कहा जो मैं ने मेरे दिल की इक तस्वीर खिंचवा दो

मँगा कर रख दिया इक शीशा चकनाचूर पहलू में

आग़ा हज्जू शरफ़

 

रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं

रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है

राहत इंदौरी

 

तुझे दुश्मनों की ख़बर न थी मुझे दोस्तों का पता नहीं

तिरी दास्ताँ कोई और थी मिरा वाक़िआ कोई और है

सलीम कौसर

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 186807