Thu, 30 Jul 2026
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विज्ञान जहां पदार्थ का अध्ययन करता है वही धर्म दर्शन आत्म तत्व या चेतना का अनुसंधानकर्ता है:- योगिराज रमेश जी

अज्ञात को ज्ञात के दायरे में लाना ही विज्ञान का लक्ष्य है

विज्ञान अभी तक सूक्ष्म शरीर तक ही अपनी यात्रा कर सका है शेष शरीर या चक्र अभी उसकी पहुंच से बाहर हैं विज्ञान की भाषा में अज्ञात का तात्पर्य अनस्तित्व से नहीं होता है अज्ञात को ज्ञात के दायरे में लाना ही विज्ञान का लक्ष्य है फिर भी इतना तो कहा जा सकता है कि विज्ञान आज मनुष्य के अंदर निहित जिन असीम क्षमताओं को समझने बुझने में लगा हुआ है उसे भारतीय योगियों चिंतकों दार्शनिकों और दिव्य पुरुषों ने बहुत पहले ही समझ बूझ लिया था वैसे भी धर्म और विज्ञान एक दूसरे के पूरक हैं इसमें भेद सिर्फ दृष्टि का है विज्ञान जहां पदार्थ का अध्ययन करता है वही धर्म दर्शन आत्म तत्व या चेतना का अनुसंधानकर्ता है इस सदी के महानतम वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का कहना था ।।अंततः धर्म को विज्ञान की ओर वह विज्ञान को धर्म की ओर लौटना होगा ।।ऐसा लगता है कि सूक्ष्मशरीर की सत्ता स्वीकारने के बाद विज्ञान इस दिशा में आगे बढ़ रहा है योगीराज श्री रमेश जी महाराज

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