Sat, 13 Jun 2026
Post Details

अहंकार में जीवन बीत रहा है और हम समझ रहे हैं अमर हो करके आए हैं ।

तुलसीदास जी के इन दोहो हम विचार करें यही जय श्रीमन्नारायण

नर पीड़ित रोग न भोग कहीं। अभिमान बिरोध अकारनहीं॥
लघु जीवन संबदु पंच दसा। कलपांत न नास गुमानु असा॥


मनुष्य रोगों से पीड़ित हैं, भोग (सुख) कहीं नहीं है। बिना ही कारण अभिमान और विरोध करते हैं। दस-पाँच वर्ष का थोड़ा सा जीवन है, परंतु घमंड ऐसा है मानो कल्पांत (प्रलय) होने पर भी उनका नाश नहीं होगा॥

Views: 154

Comments & Discussions

Be the first to comment on this article!



Latest News

Number of Visitors - 166495