Thu, 30 Jul 2026
Post Details

बोल दया और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना ही अहंकार को समाप्त करेगा:- योगिराज रमेश जी।

दया धरम हिरदे बसै, बोलै अमरित बैन।


तेई ऊँचे जानिये, जिनके नीचे नैन॥

आदर मान, महत्व, सत, बालापन को नेहु।

यह चारों तबहीं गए जबहिं कहा कछु देहु॥

इस जीने का गर्व क्या, कहाँ देह की प्रीत।

बात कहत ढर जात है, बालू की सी भीत॥

अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम।

दास 'मलूका कह गए, सबके दाता राम॥

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 186772