Sat, 13 Jun 2026
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यज्ञ के समय प्रयोग में लाए जाने वाले मंत्रों का अपना विशेष स्थान है

     यज्ञ अनुष्ठान एटम से भी शक्तिशाली है
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हमारे देश में यज्ञ हवन आदि की परंपरा सदियों से चली आ रही है इस पावन प्रक्रिया के माध्यम से सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया की कल्पना की गई है ऋषि मुनि यज्ञ में अग्नि प्रवाह के साथ मंत्रोच्चार किया करते थे जिसके परिणाम स्वरूप यज्ञ मे डाली जाने वाली सूक्ष्म औषधीय सामग्री से मानव के समस्त रोमकूप तक प्रभावित हो जाने का प्रावधान किया गया था हमारे यहां परमाणु का प्रयोग पहले भी था लेकिन तब ऐसा संकट क्यों नहीं था या फिर कहें कि रेडियो सक्रियता एक्टिविटी उस समय क्यों नहीं थी इसका एक ही सशक्त उत्तर है कि उस समय यज्ञ अनुष्ठान की परंपरा समस्त मानव समाज में समाई हुई थी जिससे समस्त कार्य सिद्ध किए जाते थे।
प्राचीन ग्रंथ वेद में यज्ञ एक मुख्य विषय है और मुख्य विषय होने के कारण यज्ञ में वैदिक मंत्रों का प्रयोग किया जाता है ऋग्वेद अथर्ववेद में पूरा-पूरा सूक्त यज्ञ चिकित्सा पर आधारित है इसके अनुसार मृत्यु की सैया पर पड़े व्यक्ति को भी अनुष्ठान से बचाया जा सकता है शतायुषा  हविषाहार्षमेनम।। (ऋग्वेद 10.१६1.3) मैं कहा गया है की 100 वर्ष की आयु दाता यज्ञ से मैं इसे बचा कर लाया हूं इसकी आयु 100 वर्ष रहेगी भगवान राम जब लंका विजय के बाद वापस अयोध्या लौटते हैं उस समय समस्त वातावरण में विनाशकारी तत्वों की अधिकता थी महर्षि वशिष्ठ के निर्देशन में अनेक अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया गया महाभारत के बाद भी इसी यज्ञ परंपरा से संपूर्ण वातावरण के विनाशकारी तत्वों को समाप्त किया गया था आज भी संपूर्ण मानवता में गंदे विचारों विनाशकारी कृत्यो की अधिकता है इसका कारण है आज पूरे विश्व में सैन्य शक्ति को बढ़ाने के नाम पर किए जाने वाले तमाम तरह तरह के विस्फोट हैं।
यज्ञ के समय प्रयोग में लाए जाने वाले मंत्रों का अपना विशेष स्थान है इसलिए यज्ञ की शक्ति को जानने के लिए मंत्र की शक्ति को भी जानना आवश्यक है वस्तुतः मंत्र ध्वनि विज्ञान पर ही आधारित है जिन ध्वनियों को मनुष्य के कान किसी भी स्थिति मे सुन न सके उस ध्वनि को वैज्ञानिक शब्दावली में अल्ट्रासाउंड कहा जाता है मंत्रों से वायुमंडल में अति सूक्ष्म कंपन उत्पन्न होते हैं आधुनिक भौतिक विज्ञानियों की मान्यता है कि रेत के एक कण को हजारों हजारों एटम बम बरसा कर भी नष्ट नहीं किया जा सकता वैज्ञानिकों द्वारा ऐसा कहने का मतलब यह है कि कोई भी पदार्थ या ध्वनि कभी नष्ट नहीं होती इसी तरह हमारे मंत्र वेक्ताओं की धारणा रही है कि आप जो कुछ भी सोचते हैं या बोलते हैं वह नष्ट नहीं होता वह सूक्ष्म तरंगों के रूप में विद्यमान रहता है भारतीय मंत्र वेक्ताओं की इस धारणा पर अब पश्चिमी देशों में बहुत बड़े-बड़े शोध किए जा रहे हैं।
मंत्र की महान शक्ति तब और बढ़ जाती है जब यज्ञ किया जाता है यज्ञ के समय लय में मंत्रों के उच्चारण के साथ-साथ अग्नि में स्वाहा की ध्वनि जब होती है तो असाध्य से असाध्य रोग दूर हो जाते हैं आज जबकि पूरा विश्व प्रदूषण की चपेट में है और कोई भी सरकार या व्यक्ति इस पर अंकुश लगाने में नाकाम रहा है ऐसे में यज्ञ की प्राचीन परंपरा हमारे लिए संजीवनी का कार्य करती है पूरा विश्व अब परमाणु विस्फोटों के विषैले तत्वों से ओतप्रोत हो चुका है इस अणु विकिरण की भयानक गति से बचने का एक ही उपाय है यज्ञ।
यज्ञ की परंपरा में कई तरह के यज्ञ किए जाते हैं यज्ञ अनुष्ठान के माध्यम से सभी विनाशकारी असत्य को तिरस्कृत कर प्रगतिशील सत्य को सर्वोच्च सिंहासन पर बैठाया जा सकता है कायरता आलस्य वासना की अंतहीन काली सुरंगों से निकलकर साहस सक्रियता व पवित्रता की गंगा में स्नान किया जा सकता है दिनों दिन लगातार बढ़ रहे तमाम तरह के प्रदूषण चाहे वह वातावरण से जुड़े हो या आपके मन विचार से जुड़े हैं उन्हें दूर करने का सबसे सशक्त माध्यम यज्ञ ही है।।।

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