Thu, 30 Jul 2026
Post Details

जो भी चाहो निकाल लो मतलब

जो भी चाहो निकाल लो मतलब

ख़ामुशी गुफ़्तुगू पे भारी है

मसरूर जालंधरी

 

तुम्हें हँसते हुए देखा है जब से

मुझे रोने की आदत हो गई है

मिर्ज़ा मोहम्मद हादी अज़ीज़ लखनवी

 

ईंट और पत्थर मिट्टी गारे के मज़बूत मकानों में

पक्की दीवारों के पीछे हर घर कच्चा लगता है

दीप्ति मिश्रा

 

जब तलक ज़ख़्म हरा रहता है

दिल तसल्ली से भरा रहता है

राजेश रेड्डी

 

रौशनी ढूँड के लाना कोई मुश्किल तो न था

लेकिन इस दौड़ में हर शख़्स को जलते देखा

 अज़्म बहज़ाद

 

दो घड़ी के साथी को हमसफ़र समझते हैं,

किस क़दर पुराने हैं हम नए ज़माने में

आलम खुर्शीद

 

हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं

इक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं

फ़रीहा नक़वी

 

मोहब्बत कम न होगी याद रखना!!

ये बढ़ती है, कि ये दौलत नहीं है

फ़रीहा नक़वी

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 186769