Thu, 04 Jun 2026
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सबसे याचना करना व्यर्थ है :,योगिराज रमेश

हर बादल वर्षा नहीं करता कुछ केवल गरजते हैं बरसते नहीं।


   रे रे चातक सावधानमनसा मित्रं क्षणंमुयता -
          मम्भोदा बहवो वासंती गगनसे सर्वेस्पि नैतादृशा |
          केचिद्वृष्टिभिरार्द्रयन्ति धरणिं गर्जन्ति केचिदृथा
          यंयं पश्यसि तस्यतस्य पुरतो मा ब्रूहि दीनं वाचः ||


 हे मेरे मित्र चातक पक्षी ! मेरी यह बात ध्यान दें सुनो | इस आकाश में
अनेक प्रकार के (मेघबादल) विचरण करते हैं पर वे एक ही स्वभाव के नहीं होते हैं
उनसे कुछ ही इस पृथ्वी को अपने मूल्य जल से ऊँचा बनाते हैं जब कि अन्य एकमात्र उद्देश्य ही गर्जते रहते हैं जहाँ अन्य विचरण करते हैं | इस लिए आप किसी भी मेघ को देख हो उसे से अपनी प्यास के लिए याचना मत करो |

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