Thu, 30 Jul 2026
Post Details

ये मरना जीना भी शायद

ये मरना जीना भी शायद मजबूरी की दो लहरें हैं

कुछ सोच के मरना चाहा था कुछ सोच के जीना चाहा है

सहर अंसारी

 

मिरी अपनी और उस की आरज़ू में फ़र्क़ ये था

मुझे बस वो उसे सारा ज़माना चाहिए था

बुशरा एजाज़

 

उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे

वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे

कुमार विश्वास

 

इस आरज़ी दुनिया में हर बात अधूरी है

हर जीत है ला-हासिल हर मात अधूरी है

अंबरीन हसीब अंबर

 

ख़ुद अपनी शय पे अधूरा है इख़्तियार मुझे

गिरा तो सकता हूँ आँसू उठा नहीं सकता

ख़ालिद नदीम बदायूनी

 

न इतराओ अपने हुनर पर लोगों 

नफ़रतें लाखों ऐब ढूँढ लेती हैं

प्रियंवदा पाण्डेय

 

बहुत से ख़्वाब देखोगे तो आँखें

तुम्हारा साथ देना छोड़ देंगी

वसीम बरेलवी

 

अगर हर हाल में ख़ुश रहना फ़न है

तो फिर सब से बड़ा फ़नकार हूँ मैं...

रहमान फ़ारिस

Comments

No comments yet.



Latest News

Number of Visitors - 186621