Thu, 30 Jul 2026
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काश, कुछ करिश्मा हो जाए

 

सुब्ह जब आए, 
तो खिड़की पे रख जाए , कुछ धूप के सुनहरे टुकड़े …  
हवा चलते-चलते कानों में  
पुराने किस्से कह जाए…  
काश, कुछ करिश्मा हो जाए!  

यादों के पन्नों में जो लफ्ज़ दबे थे,  
और बरसों से पड़े थे धूल ओढ़े ,  
बारिश आने से, धुल जाएं ,  
और वो सारे हर्फ़ फिर से पढ़े जाएं।  
काश, कुछ करिश्मा हो जाए! 

वो यादें, जो चुपचाप बैठी रहीं,  
किसी कोने में दीवार से लगकर,  
किसी रोज़ शोर कर दें अचानक से,  
कि मौसम भी थोड़ा सँवर जाए…  
काश, कुछ करिश्मा हो जाए!

 

*कंचन "श्रुता"*????

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