ਨਗਰ ਨਿਗਮ ਨੂੰ ਬਰਸਾਤ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਸ਼ਹਿਰ ਦੇ ਸਾਰੇ ਵਾਰਡਾਂ ਵਿੱਚ ਸੀਵਰੇਜ ਸਾਫ਼ ਕਰਵਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ : ਪਲਵੀ
जब पतझड़ आता है,
तो हवा में एक शोर सा घुल जाता है,
हर पत्ता, अपना रंग, अपनी यादें, सब छोड़ जाता है।
फिर वो शाखें, जो कभी हरी-भरी थीं,
अब मौन होकर, खुद से बातें करती हैं।
लेकिन तुम देखो, गिरते पत्तों को,
क्या वे सच में खो जाते हैं?
नहीं, वे तो चुपचाप धरती में समाते हैं,
और एक दिन, किसी नये पेड़ में उगते हैं।
पतझड़ तो बस एक दौर है,
जो हमें सिखाता है,
जिंदगी में अगर कोई कुछ छोड़ जाए,
तो वह सिर्फ़ ख़त्म नहीं होता,
वह किसी और रूप में लौट आता है।
पतझड़ हमें बताता है,
गिरने से डरने की नहीं, बल्कि उठने की ज़रूरत होती है।
हर पतझड़ के बाद एक नई बसंत आती है,
और हर टूटने के बाद, कुछ नया बनने की बुनियाद होती है।
*कंचन "श्रुता"*
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