जालंधर में 10 लाख की रिश्वत मामले में CGST अधिकारी और CA के खिलाफ चार्जशीट पेश
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बालिग अविवाहित बेटियों के हक में बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि अब वह बेटियां अपने पेरेंट्स से मैंटनेंस की मांग कर सकती हैं। पहले सिर्फ बेटियां तभी मेंटनेंस की हकदार मानी जाती थी जब तक वह नाबालिग हों या फिर मानसिक-शारीरिक रूप से सक्षम न हों। पर जैसे ही वह 18 साल की होती थी तो उनका यह अधिकार खत्म जाता था।
पर अब हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि अविवाहित बालिग बेटिया आत्मनिर्भर नहीं हैं तो वह अपने पेरेंट्स से गुजारा-भत्ता यानि के मेंटनेंस मांग सकती हैं। इस फैसले को महिला अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे उन बेटियों को राहत मिलेगी, जो उच्च शिक्षा या अन्य कारणों से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो पातीं।
फैसले में जस्टिस जसप्रीत सिंह पुरी ने कहा कि अगर अविवाहित बालिग बेटी न तो शादीशुदा है और न ही आत्मनिर्भर तो उसे अपने पिता से तब तक भरण-पोषण मिलना चाहिए जब तक वह शादी न कर लें या आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर न हो जाए। फैमिली कोर्ट, जहां व्यक्तित्व कानून भी प्रभावी होते हैं, ऐसी याचिकाओं पर फैसला कर सकती है।
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