पंजाब में जाकिर मूसा के चचेरे भाई समेत तीन दोषियों को आतंकवाद मामले में 10 साल की कैद
केंद्र सरकार एक ऐसा कानून बनाने जा रही है जिससे प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ़्तार होने पर पद से हटाया जा सकेगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को संसद में 3 बिल पेश किए। इस पर विपक्ष ने लोकसभा में जमकर हंगामा किया।
ये हैं तीन बिल
गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025
130वां संविधान संशोधन बिल 2025
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025
पीएम से लेकर मंत्री तक सब इसमें शामिल
इन बिल में प्रावधान है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री को गंभीर अपराधों के लिए गिरफ़्तार किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम 5 साल की कैद हो सकती है और उन्हें लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, तो उन्हें 31वें दिन पद से हटा दिया जाएगा।
विपक्ष को नहीं मांगना पड़ेगा इस्तीफा
जब भी किसी सरकार के मंत्री पर कोई आरोप लगता है तो विपक्ष सबसे पहले इस्तीफे की मांग करता है। अब इस बिल के आने के बाद विपक्ष का यह काम भी लगभग खत्म हो जाएगा। यानी अगर किसी नेता ने कोई अपराध किया है और पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेती है, तो उसका पद तुरंत छिन जाएगा। यह नियम प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री या मंत्री पर लागू होगा।
कब देना होगा इस्तीफा
यह नियम उन मामलों में लागू होगा जहां सजा पांच साल या उससे ज़्यादा है। अगर मंत्री या मुख्यमंत्री को 30 दिनों के अंदर ज़मानत नहीं मिलती, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा देना होगा। अगर गिरफ्तारी के 30 दिन बाद भी वह इस्तीफा नहीं देते, तो उन्हें 31वें दिन पद से हटा हुआ माना जाएगा।
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