Sat, 13 Jun 2026
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आज्ञा चक्र थर्ड आई त्रिनेत्र भगवान शिव का


बहुत कुछ समझने के बाद यह निष्कर्ष निकला कि इस दुनिया में सिर्फ मृतकों और मूर्खों का ही समस्याओं से कोई सरोकार नहीं होता जब तक आप जीवित हैं समस्याओं से आप का चोली दामन का साथ है और रहेगा सारी समस्याएं जिंदा रहने तक हैं वहीं मूर्ख मैं उस व्यक्ति को कहता हूं जो समस्याओं से ना वाकिफ है अज्ञानता से ग्रस्त है और वह इस प्रकार की शुतुरमुर्ग की सोच रखता है कि समस्याओं का तूफान उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता तो यह है की कुछ अपवादों को छोड़ दें तो हर व्यक्ति समस्याओं के सागर में डूबा हुआ है जब तक जीवन है तब तक समस्याएं हैं इस संबंध में प्रख्यात ब्रिटिश दार्शनिक सी ई एम जोड कि इस बात से हम सहमत हैं  कि प्रसव पीड़ा के बाद ही जन्म होता है आमतौर पर दुनिया भर में शिशु के जन्म को सुखद घटना माना जाता है लेकिन गर्भस्थ शिशु की मां के साथ जन्म से पहले जो घटना घटित होती है वह बेहद पीड़ादायक होती है।
समस्याएं हैं तो उनका समाधान भी है यहां पर प्यास लगने से पहले जल उपलब्ध है उड़ने से पहले आकाश उपलब्ध है सांस लेने से पहले प्राणवायु ऑक्सीजन उपलब्ध है कहने का मतलब यह है कि समस्याएं हैं तो उसका समाधान है बस जरूरत है साहस की संकल्प की परिश्रम की सकारात्मक सोच की और दूरदर्शिता पूर्ण मन मस्तिष्क की  उपर्युक्त गुणों की चाबी से ही आप अपनी समस्या रुपी तालों को सहजता से खोल सकते हैं।
त्रिनेत्र शिव नेत्र या थर्ड आई पर ध्यान केंद्रित कर यहां स्थित आज्ञा चक्र को जागृत कर आप दैहिक दैविक और भौतिक ही नहीं बल्कि अनेकानेक मानसिक समस्याओं का समाधान कर सकते हैं त्रिनेत्र व आज्ञा चक्र के संदर्भ में आपको बताया जा सकता है बताया जाएगा जब आपकी इच्छा होगी संपर्क करने पर आपको बताया जा सकता है हरि ओमःः योगिराज रमेश जी महाराज

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