Thu, 30 Jul 2026
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भगवान श्री कृष्ण ने सिखाया जीवन जीने का रास्ता ।

परित्राणाय साधुनाम् विनाशाय च दुष्कृताम्।।
धर्म संस्थापनार्थाय संम्भवामि युगे युगे।।
●●●●○●●●●●●●●●●● दुनिया का कौन सा संकट है जो भगवान श्री कृष्ण ने हंसते-हंसते न झेला हो हर संकट का युक्ति से निराकरण भी किया माता पिता युवावस्था में ही कारागार में और अग्रज वही कारागार से मारे जाते हैं भगवान ने आंखें जेल में खोली और माता-पिता का सुख नहीं मिला पराए घर में लालन पालन हुआ जन्म स्थान छोड़कर द्वारिका में शरण लेना पड़ा इसीलिए रणछोड़ ने पर रणछोड़ कहे गए पूरा जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करते हुए बीता विजई होने पर भी राजा बनना स्वीकार नहीं किया सर्वगुण संपन्न होने के बाद भी अर्जुन के सारथी बने गांधारी ने श्राप दिया कि सारे कुल का नाश हो जाए उसको भी हंसते हुए स्वीकार किया भगवान ने कहा तुम्हारे ज्ञान चक्षु होते तो तुम समझ जाती कि हर बार मैं ही मारा हूं।
इसके बाद यादव वंश का विनाश अपने सामने देखते हैं कुलिकी ललना ओं के अपहरण होने पर महाबली अर्जुन भी नहीं बचा सकेः
भीलन लूटी गोपिका सोई अर्जुन सोई बान।।
इस पर भी वीर की मृत्यु जंगली पशुओं की तरह व्याध के हाथों हुई।
धन्य हैं श्री कृष्ण की ऐसे संकट पूर्ण जीवन में सदा धर्म की मर्यादा बनाए रहे हंसते-हंसते भयानक विपत्तियों को झेला गीता में सब कुछ कहा जो कोई नहीं कर सका था भारतीय दर्शन का परम सत्य श्री कृष्ण ने गीता में गायन किया महाभारत युद्ध एक वित्त अंडा है धर्म की स्थापना के लिए हमने जन्म लिया है ऐसा प्रभु ने कहा इसीलिए महाभारत को धर्म युद्ध कहा गया हैः
पांडवों का धर्म पक्ष गौरव का अधर्म पक्ष अनेकों प्रसंगों में सूत्रधार बने हथियार न उठाने का संकल्प किया युद्ध के श्री गणेश पर श्री कृष्ण ने कहा जिधर धर्म है मैं उधर रहता अंत में दिखाया कि जिधर मैं हूं धर्म भी उधर ही है।
भगवान श्री कृष्ण ने कहा जो व्यक्तिगत भावना से कार्य करते हैं पर समाज की हानि करते हैं वह धर्म के मार्गी नहीं है पांडवों का पक्ष धर्म का था क्योंकि वह मानव कल्याण का मार्ग था।
कृष्णाय वासुदेवाय हरि परमात्मने।
प्रणत क्लेश नाशाय हरये परमात्मने।।

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