Wed, 03 Jun 2026
Post Details

जीने की कला


परम श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी 
महाराजका प्रवचन—
    मनुष्य जीवन संसार से ऊंचा उठने के लिए है, संसार में दबने के लिए नहीं है। अनुकूलता, प्रतिकूलता को लेकर सुख-दु:ख में उलझ जाना संसार से दबना है। 'दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः सुखेषु विगतस्पृहः।' भगवान् कहते हैं— 'दुःख में हलचल नहीं होनी चाहिए और सुख में खुशी नहीं होनी चाहिए।' जिनका मन साम्यावस्था में स्थित हो गया, उन्होंने जीते-जी संसार को जीत लिया और जिनके ऊपर परिस्थितियों का असर पड़ गया, वे संसार से हार गये।मनुष्य शरीर में जो भी सुखदायी-दुःखदायी परिस्थितियाँ आती हैं , ये सुखभोग के लिए नहीं आती हैं , इनसे ऊपर उठकर परमात्म प्राप्ति के लिए आती हैं । कामनाके कारण ही अच्छी-बुरी परिस्थितियों में राग-द्वेष, हर्ष-शोक होते हैं, मनमें यदि कामना नहीं हो तो प्रतिकूलता में दुःख हो सकता ही नहीं। कामना के कारण ही वस्तुओं के अभाव का दुःख होता है। नाशवान् सुख तो प्रारब्ध में लिखा हो तो मनुष्येतर पशु-पक्षियों की योनियों में भी मिल जाता है, यदि मनुष्य शरीर प्राप्त करके भी उन्हीं में फँसे रहे, तो मनुष्य शरीर का माहात्म्य जाना नहीं; मनुष्य शरीर सुख-दु:ख से ऊपर उठकर महान् आनन्द की प्राप्ति के लिए मिला है।

'एहि तन कर फल बिषय न भाई। स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई॥' हमारे पास जो भी धन-सामग्री, विद्या, बुद्धि-बल, योग्यता आदि है, ये सब दूसरों को सुख पहुंचाने के लिए है। प्रतिकूलता में सुख की इच्छा का त्याग करना है और अनुकूलता में भोग की इच्छा का त्याग करना है।


 हमारे यहाँ दिन और रात्रि दो होते हैं, लेकिन सुर्य भगवान् में नित्य प्रकाश है, वहाँ रात्रिका लवलेश भी नहीं है। ऐसे ही सच्चिदानन्द भगवान् में मोह रूपी रात्रिका लवलेश भी नहीं है, उनमें नित्य आनन्द है। 'पूरे हैं मर्द वो जो हर हाल में खुश हैं।' परिस्थितियों को बदलना हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन 
परिस्थितियों से ऊपर उठने में हम सब स्वतंत्र है, फिर पराधीनता सर्वथा मिट जाती है।
 रामायण में अयोध्या काण्ड में रामजी को बुलाने सचिव गये तो वहाँ रामजी को दीपक की उपमा दी गई, दशरथ जी के पास पहुंचे तो
 मणि की उपमा और वनवास की बात सुनी,
 उस समय रामजी को सूर्य की उपमा दी गई; मानो जैसे-जैसे रामजी पर प्रतिकूलता आती 
गई, उनका तेज भी बढ़ता गया। इस तरह 
मनुष्यकी प्रतिकूलता में विशेष उन्नति होती जाती है.
आत्मा को उंचाई पर ले जाने के लिये मन का शान्त होना जरुरी है. सीखे मन को शांत करने की विधिया. मां पूजा जी के सानिध्य मे. @ 
 Holistic Ocean.9878995575.

Views: 104

Comments & Discussions

Be the first to comment on this article!



Latest News

Number of Visitors - 164651