Wed, 03 Jun 2026
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खांसी-बुखार से लेकर हार्ट तक की दवाएं फेल: Paracetamol, Clopidogrel, Telmisartan भी NSQ घोषित

देश में एक बार फिर दवाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ताजा जांच में कुल 205 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। इन दवाओं में खांसी, बुखार, शुगर और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली मेडिसिन भी शामिल हैं। जांच के बाद इन दवाओं को ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) घोषित किया गया है।

CDSCO की जांच में सामने आई खामियां
CDSCO ने देशभर में निर्मित दवाओं के सैंपल लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच की थी। रिपोर्ट के अनुसार, कई दवाएं तय मानकों पर खरी नहीं उतरीं। यह पहली बार नहीं है जब दवाओं के सैंपल फेल हुए हों, इससे पहले भी अलग-अलग राज्यों में बनी दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठ चुके हैं।

हिमाचल प्रदेश में बनी 47 दवाएं फेल
फेल हुई दवाओं में से 47 दवाएं हिमाचल प्रदेश की फार्मा इकाइयों में निर्मित पाई गई हैं। ये दवाएं बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, सोलन, कालाअंब, पांवटा साहिब और ऊना जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बनी थीं। जांच एजेंसी के अनुसार, इन सभी दवाओं को गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने के कारण NSQ घोषित किया गया है।

बुखार, शुगर और हार्ट की दवाएं भी लिस्ट में शामिल
NSQ घोषित की गई दवाओं की सूची में पैरासिटामोल, मेटफॉर्मिन, क्लोपिडोग्रेल, एस्पिरिन, रेमिप्रिल, सोडियम वैल्प्रोएट, मेबेवेरिन हाइड्रोक्लोराइड, टेलमीसार्टन, क्लेरिथ्रोमाइसिन, सेफिसाइन और जेंटामाइसिन इंजेक्शन जैसी आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का उपयोग टाइफाइड, फेफड़ों और मूत्र संक्रमण, खांसी, अस्थमा, एलर्जी और पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के इलाज में किया जाता है।

दवाओं की गुणवत्ता पर बढ़ती चिंता
लगातार दवाओं के सैंपल फेल होने से मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी दवाओं के बाजार में आने से मरीजों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। CDSCO की ओर से संबंधित कंपनियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

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