Thu, 30 Jul 2026
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दिल्ली में सांस लेना मुश्किल, हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछा– एयर प्यूरीफायर पर टैक्स कब घटेगा?

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को राजधानी की बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों से सवाल किया कि जब हवा की स्थिति इमरजेंसी जैसी बनी हुई है, तो एयर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत जीएसटी क्यों लगाया जा रहा है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि सरकार नागरिकों को साफ हवा उपलब्ध नहीं करा पा रही है, तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर टैक्स कम किया जाना चाहिए।

साफ हवा हर नागरिक का मौलिक अधिकार: हाईकोर्ट
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गडेला की डिवीजन बेंच ने कहा कि हर नागरिक को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार है। ऐसे हालात में एयर प्यूरीफायर को लग्जरी वस्तु मानकर उस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाना उचित नहीं है।

मेडिकल डिवाइस का दर्जा देने की अपील
कोर्ट के समक्ष दायर जनहित याचिका में मांग की गई है कि एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में रखा जाए और इन पर लगने वाला जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाए। याचिका में कहा गया कि खराब AQI के दौर में एयर प्यूरीफायर अब विलासिता नहीं, बल्कि जरूरत बन चुके हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील को दोपहर 2:30 बजे के बाद इस पर जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

दिल्ली में प्रदूषण से होता है इन्फेक्शन - गडकरी
इसी बीच सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में कहा कि दिल्ली में दो-तीन दिन रहने पर उन्हें इन्फेक्शन हो जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रदूषण का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा ट्रांसपोर्ट सेक्टर से आता है, जिसकी जिम्मेदारी उनके मंत्रालय पर है।

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