Thu, 04 Jun 2026
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पंजाब में धुंध-शीत लहर, कई शहरों में जीरो विजिबिलिटी

पंजाब और चंडीगढ़ के निवासियों के लिए आज का दिन भी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चुनौतियों से भरा रहने वाला है। मौसम विभाग ने सोमवार के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी करते हुए चेतावनी दी है कि सुबह और रात के समय धुंध व शीत लहर की स्थिति गंभीर बनी रहेगी। राहत की एक उम्मीद 31 दिसंबर और नए साल के पहले दिन जताई गई है, जब राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। विभाग के अनुसार इस वर्षा के पश्चात मौसम के धीरे-धीरे साफ होने के आसार हैं।

तापमान में गिरावट और यातायात पर प्रभाव
पिछले 24 घंटों के दौरान पंजाब के न्यूनतम और अधिकतम तापमान में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। राज्य के औसत न्यूनतम तापमान में 1.1 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है, जिससे पारा अब सामान्य स्तर के करीब पहुंच गया है। फरीदकोट 3.4 डिग्री सेल्सियस के साथ राज्य का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां गुरदासपुर के साथ मिलकर शीत लहर का प्रभाव सबसे अधिक देखा गया।

कोहरे की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमृतसर, आदमपुर, पठानकोट और बठिंडा में दृश्यता शून्य तक गिर गई। वहीं लुधियाना में 10 मीटर, पटियाला में 20 मीटर और बठिंडा में 50 मीटर दृश्यता रिकॉर्ड की गई है। इस खराब मौसम का सीधा असर यातायात पर पड़ा है, जिसके चलते चंडीगढ़ और अमृतसर हवाई अड्डों से 4 उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं।

जिलों के अनुसार मौसम का हाल
मौसम विभाग ने 11 जिलों में शीत लहर चलने की विशेष आशंका व्यक्त की है। पठानकोट, गुरदासपुर, फाजिल्का, मुक्तसर, बरनाला, मानसा, संगरूर, रूपनगर और मोहाली में कहीं-कहीं घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। वहीं अमृतसर, तरनतारन, नवांशहर, फिरोजपुर, फरीदकोट, मोगा, बठिंडा और होशियारपुर जैसे जिलों में घने कोहरे के साथ-साथ शीत लहर का दोहरा प्रकोप देखने को मिल सकता है। सबसे अधिक सतर्कता कपूरथला, जालंधर और लुधियाना में बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि यहाँ बहुत घने कोहरे और तीव्र शीत लहर की स्थिति बन सकती है। फतेहगढ़ साहिब और पटियाला में भी दृश्यता काफी कम रहने का अनुमान है।

वेस्टर्न डिस्टर्बैंस और भविष्य का अनुमान
वर्तमान में वायुमंडल की ऊपरी परत में एक वेस्टर्न डिस्टर्बैंस एक्टिव है, जो ऊंचाई पर हवाओं के साथ गति कर रहा है। इसके साथ ही 30 दिसंबर से एक नए वेस्टर्न डिस्टर्बैंस आने की संभावना है, जो वर्तमान में पाकिस्तान के ऊपर बना हुआ है। इसके प्रभाव से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में मौसम में बदलाव की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नए सिस्टम के सक्रिय होते ही तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे कड़ाके की ठंड से कुछ राहत मिल सकती है। पुराना वेस्टर्न डिस्टर्बैंस अब उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बढ़ते हुए क्षेत्र से बाहर निकल चुका है।

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