असम में वायुसेना का AN-32 विमान क्रैश, पायलट समेत 5 जवानों की शहीद
जैसे जैसे 2027 नजदीक आ रहा है वैसे ही पूरे पंजाब की सियासत के साथ साथ जालंधर वेस्ट की सियासत में भी हलचल होने वाली है। मजबूत जनाधार होने के बावजूद भी कांग्रेस पार्टी का मेघ/भगत समुदाय को लगातार अनदेखा करना कांग्रेस के लिय नई मुसीबत पैदा कर सकता है। यहाँ वर्णनीय है कि भगत/मेघ समुदाय पिछले 2 दशक से जालंधर वेस्ट से अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है और हर बार कांग्रेस पार्टी इस समुदाय को अनदेखा कर रही है जबकि दूसरी और भारतीय जनता पार्टी और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने इसका फ़ायदा उठाते हुए भगत समुदाय को विधायक , पार्टी नेता , कैबिनेट मंत्री और कई महत्वपूर्ण विभागों के चेयरमैन तक दिए है।इसका खामियाजा कांग्रेस को पिछले कई चुनावो में उठाना भी पड़ा है। आने वाले समय मे एक बहुत बड़ा उलटफेर जालंधर की सियासत में देखने को मिलने की संभावना से भी इंकार नही किया जा सकता। यहाँ बताना जरूरी है कि भगत समुदाय ना बल्कि जालंधर वेस्ट बल्कि जालंधर नार्थ , जालंधर कैंट ,और नकोदर , बटाला, लुधियाना , अमृतसर , पठानकोट में भी काफी असर रखता है। अब देखना रोमांचिक होगा कि आने वाले समय मे कांग्रेस पार्टी भगत समुदाय का हाथ थामती है या इसका नुकसान उठाती है भगत समुदाय से संबंधित और टकसाली कांग्रेस परिवार से संबंधित युवा नेता अरुण रत्न ने कहा कि अब समय आगया है कि कांग्रेस पार्टी भी दूसरी पार्टियों की तरह भगत समुदाय को इनका बनता हुआ हक दे जिस से आने वाले पीढ़ी और युवा पार्टी की तरफ आकर्षित हो और एक नया जोश भरा जा सके।
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