Thu, 04 Jun 2026
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पीएम मोदी ने देश को दिलाया सुरक्षित भविष्य का भरोसा, कहा-41 देशों से तेल आयात और कच्चे तेल का भारी रिजर्व तैयार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में पश्चिम एशिया के चिंताजनक हालातों पर देश को संबोधित किया। पीएम ने स्पष्ट किया कि तीन हफ्ते से जारी यह संकट बेहद गंभीर है और इसका सीधा असर मानवीय जीवन पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले करीब 1 करोड़ भारतीय नागरिक और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग क्रू में शामिल भारतीय सदस्य हमारी सबसे बड़ी चिंता हैं। प्रधानमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि वे स्वयं प्रभावित देशों के राष्ट्रप्रमुखों के संपर्क में हैं और अब तक 3.75 लाख भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा चुका है, जिसमें ईरान से लौटे 700 मेडिकल छात्र भी शामिल हैं।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए डायवर्जन रणनीति पर काम
प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानी 'एनर्जी सिक्योरिटी' पर बात करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाला व्यापार बाधित हुआ है, लेकिन भारत ने इसके लिए पहले ही पुख्ता इंतजाम कर लिए हैं। सरकार ने तेल आयात के लिए अपने स्रोतों का दायरा 27 देशों से बढ़ाकर अब 41 देशों तक कर दिया है। इसके साथ ही, देश में 65 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के इमरजेंसी रिजर्व पर तेजी से काम चल रहा है। पीएम ने कहा कि सरकार विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सप्लायर्स के साथ निरंतर संवाद में है ताकि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई सुचारू बनी रहे।

किसानों को संकट से बचाने के लिए 'मेड इन इंडिया' विकल्प
युद्ध के चलते वैश्विक फर्टिलाइजर सप्लाई चेन में आने वाली दिक्कतों पर पीएम ने किसानों को भरोसा दिलाया कि भारत के पास पर्याप्त अन्न भंडार और यूरिया का स्टॉक मौजूद है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में उछाल के बावजूद भारतीय किसानों को यूरिया की बोरी 300 रुपये से कम में उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए 6 नए यूरिया प्लांट शुरू किए हैं और 'मेड इन इंडिया' नैनो यूरिया व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि विदेशों पर निर्भरता कम की जा सके।

आर्थिक स्थिरता के लिए हाई-लेवल मॉनिटरिंग
पीएम मोदी ने जानकारी दी कि पश्चिम एशिया के इस युद्ध का भारतीय अर्थव्यवस्था पर दुष्प्रभाव कम करने के लिए सरकार ने एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। यह ग्रुप प्रतिदिन बैठक कर आयात-निर्यात में आने वाली बाधाओं की समीक्षा करता है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत अपनी रणनीति के तहत हर उस सेक्टर को जरूरी सपोर्ट दे रहा है जो इस वैश्विक संकट से प्रभावित हो सकता है। उन्होंने संसद से एकजुट होकर दुनिया को शांति का संदेश देने और भारतीयों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराने का आह्वान किया।

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