Thu, 30 Jul 2026
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रिश्ता"बारिश जैसा नहीं होना चाहिए ……….

अरुण रत्न के संकलन 


रिश्ता"बारिश जैसा नहीं होना चाहिए, जो बरसकर खत्म हो जाय।*
                   *बल्कि*
   *"रिश्ता" हवा की तरह होना चहिये, जो खामोश हो मगर सदैव आस पास हो।

*अगर खोने का डर और* 
*पाने की चाहत न होती*
*तो न भगवान् होता*
 *और न प्रार्थना होती*

जीवन में शांति चाहते हैं तो दुसरों की शिकायतें करने से बेहतर है खुद को बदल लें। क्योंकि पुरी दुनिया में कारपेट बिछाने से खुद के पैरों में चप्पल पहन लेना अधिक सरल है।

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