Sat, 13 Jun 2026
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 *हमेशा मुस्कुराते रहिए*... अरुण रत्न

*दो चीजों को कभी व्यर्थ*
*नहीं जाने देना चाहिए*.....

          *अन्न के कण को*
                *"और"*
           *आनंद के क्षण को*

 *हमेशा मुस्कुराते रहिए*....
*कभी अपने लिये कभी अपनों के लिये*
*जिंदगी पिता की देन है*
*और पिता का साथ रहना*
*किस्मत की देन है*

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