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केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपए कर दिया गया है, जबकि डीजल पर यह ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। सरकार का यह फैसला आम लोगों पर बढ़ते ईंधन के बोझ को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना वजह
इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच चुकी हैं। इस तेजी से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने की नौबत आ सकती थी।
तेल कंपनियों को भारी नुकसान
पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में 30% से 50% तक की बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में भारत की तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 24 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 30 रुपए प्रति लीटर का नुकसान झेल रही हैं। ऐसे में टैक्स में कटौती कर कंपनियों को राहत देने की कोशिश की गई है।
सप्लाई संकट की आशंका से उठाया कदम
यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण ‘Strait of Hormuz’ जैसे अहम समुद्री मार्ग पर संकट मंडरा रहा है। दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है और भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा यहीं से आयात करता है। संभावित सप्लाई बाधित होने और कीमतों में तेज उछाल की आशंका को देखते हुए सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप किया है।
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