Thu, 30 Jul 2026
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मनोहर लाल खट्टर का बड़ा ऐलान, बिजली मीटर के लिए नहीं होगा दबाव

केंद्र सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को एक बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि अब घरों में प्रीपेड मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं होगा। लोकसभा में जानकारी देते हुए सरकार ने बताया कि यह पूरी तरह से ग्राहकों के विवेक पर निर्भर करेगा कि वे प्रीपेड मीटर चुनना चाहते हैं या पारंपरिक पोस्टपेड मीटर। सरकार ने साफ कर दिया है कि कोई भी बिजली कंपनी किसी भी ग्राहक को प्रीपेड मीटर लगवाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने किया स्थिति को साफ
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान इस महत्वपूर्ण विषय पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने उन सभी दावों और आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि केंद्र सरकार निजी बिजली कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए ग्राहकों पर प्रीपेड मीटर थोपने का दबाव बना रही है। मनोहर लाल खट्टर ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार का मुख्य लक्ष्य व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है, न कि किसी विशेष तकनीक को अनिवार्य बनाना। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीटर बदलने की पूरी प्रक्रिया में उपभोक्ताओं की सहमति का सम्मान किया जाएगा।

गरीबों के लिए छोटे रिचार्ज की सुविधा
प्रीपेड व्यवस्था में एडवांस भुगतान को लेकर उठने वाली चिंताओं, विशेष रूप से गरीब वर्ग की समस्याओं पर भी सरकार ने समाधान पेश किया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि दिहाड़ी मजदूरों और कम आय वाले परिवारों की सुविधा के लिए 'फ्लेक्सिबल रिचार्ज' विकल्प उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके तहत उपभोक्ता अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार महज 5 से 10 दिनों का छोटा रिचार्ज भी करवा सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति को एक साथ पूरे महीने का एडवांस पैसा जमा करने की विवशता न हो और वे अपनी जरूरत के हिसाब से बिजली का उपयोग कर सकें।

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