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न्यूज़ीलैंड की डनेडिन कोर्ट ने हत्याकांड में जालंधर के युवक रजिंदर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला लुधियाना के रहने वाले गुरजीत सिंह की बेरहमी से की गई हत्या से जुड़ा है। 29 जनवरी 2024 की रात रजिंदर, गुरजीत के घर पहुंचा और वहां जमकर मारपीट की।
रजिंदर ने गुरजीत पर चाकू से 46 बार हमला किया। हमले इतने घातक थे कि गुरजीत का सिर धड़ से लगभग अलग होने की स्थिति में आ गया था। इस जघन्य अपराध ने न केवल न्यूज़ीलैंड बल्कि भारत में भी शोक की लहर दौड़ा दी थी।
दो साल बाद मिला इंसाफ और कड़ा फैसला
करीब दो साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। डनेडिन कोर्ट ने मामले की गंभीरता और क्रूरता को देखते हुए रजिंदर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपराधी को किसी भी प्रकार की पैरोल नहीं दी जाएगी, जिसका अर्थ है कि वह ताउम्र सलाखों के पीछे रहेगा।
इसके साथ ही अदालत ने दोषी को पीड़ित परिवार और विधवा महिला को 8 हजार डॉलर का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। गुरजीत के पिता निशान सिंह ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि अब उनके इकलौते बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी।
उजड़ गए सुनहरे भविष्य के सपने
27 साल का गुरजीत सिंह अपने माता-पिता का इकलौता सहारा था। उसकी शादी हत्या से महज आठ महीने पहले हुई थी और वह न्यूज़ीलैंड में अपनी नई जिंदगी की नींव रख रहा था। सबसे दुखद पहलू यह है कि गुरजीत की पत्नी अपनी शादी के बाद पहली बार न्यूज़ीलैंड आने वाली थी। डिटेक्टिव सीनियर सार्जेंट निक लेघ ने बताया कि गुरजीत की पत्नी के आने में सिर्फ एक हफ्ता बचा था, लेकिन उससे पहले ही इस वारदात ने सब कुछ खत्म कर दिया।
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