Thu, 30 Jul 2026
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पंजाब में ऐतिहासिक बेअदबी कानून को मंजूरी, राज्यपाल ने बिल पर लगाई मुहर

पंजाब में लंबे समय से लंबित बेअदबी के मामलों पर लगाम लगाने के लिए अब एक अत्यंत सख्त कानून लागू हो गया है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इस महत्वपूर्ण बिल पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिससे इसे आधिकारिक कानूनी दर्जा मिल गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता के साथ यह जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि यह नया कानून विशेष रूप से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी को रोकने और पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। सरकार इस कानून को पूर्ण रूप से लागू करने के लिए जल्द ही गजट नोटिफिकेशन जारी करने की तैयारी में है।

सजा के कड़े प्रावधान और आर्थिक दंड

नए कानून के तहत सजा की गंभीरता को काफी बढ़ा दिया गया है। अब बेअदबी के दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है। इसके साथ ही दोषियों पर 5 लाख रुपए से लेकर 25 लाख रुपए तक का भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। इस कानून को 'गैर-जमानती' और 'संज्ञेय' अपराध की श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि पुलिस आरोपी को बिना किसी पूर्व नोटिस या वारंट के गिरफ्तार कर सकती है और अदालत से जमानत मिलना भी अब बेहद कठिन होगा। एक अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि यदि कोई मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति ऐसी घटना को अंजाम देता है, तो उसके अभिभावक या गार्जियन को भी कानूनी जिम्मेदारी का सामना करना पड़ेगा और उन्हें भी सजा दी जा सकती है।

अपराध का दायरा और कानूनी परिभाषा

इस कानून में बेअदबी की परिभाषा को काफी विस्तृत किया गया है ताकि किसी भी तरह की कोताही की गुंजाइश न रहे। अब पवित्र ग्रंथ को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुँचाना, उसका अपमान करना, उसे मर्यादा के विरुद्ध गलत स्थान पर रखना या चोरी करना गंभीर अपराध माना जाएगा। इसके अतिरिक्त, यदि कोई व्यक्ति पवित्र ग्रंथ के समीप नशा करता है या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई भी अपमानजनक टिप्पणी या सामग्री पोस्ट करता है, तो उसे भी बेअदबी के दायरे में ही गिना जाएगा। फिलहाल यह कानून केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लिए लागू किया गया है, हालांकि सरकार अन्य धर्मों के पवित्र ग्रंथों के लिए भी इसी प्रकार के कानून बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और पृष्ठभूमि

पंजाब के राजनीतिक गलियारों में इस कानून का स्वागत किया गया है। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार के इस कदम की सराहना की है, लेकिन उन्होंने एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी उठाया कि कानून की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब पुराने लंबित मामलों में भी त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि साल 2015 में हुए बरगाड़ी बेअदबी कांड के बाद से ही पंजाब में यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील रहा है। जनता और धार्मिक संगठनों के भारी दबाव और भावनाओं को देखते हुए सरकार ने यह कठोर कदम उठाया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

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