Thu, 30 Jul 2026
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बिहार का वर्तमान मंत्रिमंडल परिवारवाद के प्रतिबिम्ब है. लेकिन भाजपा का पहला मंत्रिमंडल बिहार में कायस्थ विहीन है : आनन्द माधव

पटना: 08 मई, 2026 (सोनू) : आनन्द माधव वरीय नेता, बिहार कांग्रेस एवं सदस्य , एआईसीसी ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि 
वर्षों की तपस्या के बाद भाजपा के नेतृत्व में बिहार में पहली सरकार बनी. हालांकि, बिहार का वर्तमान मंत्रिमंडल परिवारवाद के प्रतिबिम्ब है. लेकिन भाजपा का पहला मंत्रिमंडल बिहार में कायस्थ विहीन है. आश्चर्य की बात यह है कि जिस दल का राष्ट्रीय अध्यक्ष कायस्थ जाति से आता हो, उसी के राज्य में एक भी कायस्थ मंत्री नहीं बना. बिहार कांग्रेस के नेता और एआइसीसी सदस्य आनन्द माधव ने एक बयान जारी करके कहा कि कायस्थ जाति का वोट चाहे कितना भी हो, वह लगभग सारा भाजपा को जाता है, उसी जाति का बिहार मंत्रिमंडल में सदस्य नहीं होना एक दुखद बात है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरे देश का होता है, अतः यह मान लेना कि नितिन नबीन जी को भाजपा का अध्यक्ष बनाने से कायस्थों का प्रतिनिधित्व हो गया एक भारी भूल है. इसका प्रतिकार होना ही चाहिए. इसके लिए सभी कायस्थों को एक हो, दल के बंधन से ऊपर उठ सोचना पड़ेगा. आखिर कब तक कायस्थ जाति राजनीतिक हाशिए पर रहेगी, खासकर बिहार में. कायस्थ बिहार का एक प्रमुख समुदाय है, जो शिक्षा, राजनीति, नौकरशाही और समाज सुधार में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। विदित हो कि 1952 में, बिहार की पहली विधानसभा में 54 कायस्थ विधायक थे, लेकिन धीरे धीरे यह कम होता चला गया. आज तो यह जाति राजनीति में विलोपन के कगार पर है. कोई भी दल जाति को वोट प्रतिशत में आंकता है. वे यह भूल जातें हैं कि नौकरशाही और न्यायपालिका में भी आज भी कायस्थों का काफी प्रभाव है। जनमत निर्माण में इनकी भूमिका अतिमहत्वपूर्ण है, जिसे नाकारा नहीं जा सकता. इनकी कलम में बहुत ताकत है.
आनन्द माधव ने कहा कि बिहार की कायस्थ विरासत बहुत समृद्ध है; लॉर्ड सच्चिदानंद सिन्हा, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लोक नायक जय प्रकाश नारायण, के.बी. सहाय और महामाया प्रसाद जैसी महान हस्तियाँ इसी समुदाय से आतें हैं। अकेले जय प्रकाश नारायण जी की संपूर्ण क्रांति ने कांग्रेस के वर्षो के शासन को समाप्त कर दिया था. बिहार आज बिहार है तो, लॉर्ड सच्चिदानंद सिन्हा जी के दूरदर्शिता कि वजह से.
अब समय आ गया है कि इस समुदाय का पोषण किया जाए और उनका विश्वास जीता जाए। सभी राजनीतिक दलों को इस दिशा में सोचते हुए उचित कदम उठाना चाहिए. कायस्थों को राजनीति में हिस्सेदारी चाहिए ही चाहिए ।
 

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