Thu, 04 Jun 2026
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13 गोलियां लगने के बाद बची पंजाबी युवती, अब कनाडा पुलिस के खिलाफ पहुंची कोर्ट

कनाडा में रहने वाली 31 वर्षीय पंजाबी मूल की युवती सप्रीत कौर सिद्धू ने स्थानीय पुलिस प्रशासन के खिलाफ एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सप्रीत ने कनाडा पुलिस की कथित घोर लापरवाही को अपने माता-पिता की मौत की वजह बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पुलिस विभाग से मुआवजे के तौर पर $90 मिलियन (लगभग 558 करोड़ भारतीय रुपए) के भारी-भरकम हर्जाने की मांग की है। 20 मई 2026 को अपने वकील फ्रेडरिक शूमान के माध्यम से दायर किए गए इस केस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है।

खुशियों के बीच अचानक बरपा कहर
यह दर्दनाक मामला करीब तीन साल पुराना है, जब पंजाब के अमृतसर से हरभजन सिद्धू और जगतार सिंह सिद्धू कनाडा के ओंटारियो प्रांत आए थे। वे यहाँ अपनी बेटी सप्रीत और बेटे गुरदित्त सिद्धू से मिलने के लिए पहुंचे थे। परिवार ओंटारियो के एक घर में ठहरा हुआ था, जिसे पुलिस द्वारा सुरक्षित घोषित किया गया था। लेकिन 20 नवंबर 2023 की रात को यह सुरक्षा का दावा पूरी तरह खोखला साबित हुआ। घर में अचानक कुछ हथियारबंद हमलावर घुस आए और उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें सप्रीत के माता-पिता की मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस की चूक और गलत पहचान का शिकार
सप्रीत सिद्धू का आरोप है कि कनाडाई पुलिस को इलाके में मंडरा रहे खतरों की पूरी जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद परिवार को सचेत नहीं किया गया। हमलावर असल में किसी "बॉबी" नाम के व्यक्ति की तलाश में आए थे, लेकिन पुलिस की खुफिया विफलता और सुरक्षात्मक लापरवाही के कारण बेकसूर बुजुर्ग दंपत्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी। दूसरी ओर, कनाडाई पुलिस का कहना है कि यह घटना एक दुर्भाग्यपूर्ण 'गलत पहचान' (Mistaken Identity) का मामला थी और उन्हें पहले से किसी विशिष्ट खतरे का इनपुट नहीं था।

13 गोलियां खाकर भी जिंदा बची सप्रीत
इस बर्बर हमले में सप्रीत कौर खुद भी मौत के मुंह से वापस लौटी हैं। हमलावरों ने उनके शरीर पर एक के बाद एक 13 गोलियां दागी थीं। कंधे, पेट, गले और पैरों में गोलियां लगने के बाद उन्हें बेहद गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने 18 घंटे लंबा जटिल ऑपरेशन कर उनकी जान बचाई। लंबे समय तक आवाज खोने और महीनों इलाज चलने के बाद भी सप्रीत पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाई हैं। उनकी रीढ़ की हड्डी के पास आज भी एक गोली फंसी हुई है, जिसके चलते उन्हें चलने-फिरने और सामान्य कामकाज करने में गंभीर शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ अब उन्होंने कोर्ट में न्याय की गुहार लगाई है।

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