कनाडा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के आवेदन खारिज होने के बाद करीब 1000 भारतीय छात्र गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इनमें लगभग 500 छात्र पंजाब से हैं। सभी छात्र पिछले तीन सप्ताह से अल्बर्टा के कैलगरी में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, कुछ छात्रों ने 29 जुलाई से अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है। बारिश, तेज धूप और खराब मौसम के बावजूद छात्र सड़कों पर डटे हुए हैं और सरकार से अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग कर रहे हैं।
नियम बदलने का आरोप, डिपोर्टेशन का बढ़ा खतरा
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि उन्होंने जिन नियमों के आधार पर लाखों रुपये खर्च कर कनाडा में पढ़ाई पूरी की, अब उन्हीं पाठ्यक्रमों को गैर-मान्य (Non-Credible) बताकर उनके वर्क परमिट आवेदन खारिज किए जा रहे हैं। इस फैसले के कारण सैकड़ों भारतीयों पर डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है। कई छात्राओं ने मानसिक तनाव और डिप्रेशन की बात कही है। उनका कहना है कि परिवारों ने भारी कर्ज लेकर उन्हें विदेश भेजा था और पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें कनाडा में काम करने का अवसर मिलना चाहिए।
अल्बर्टा सरकार का बयान
अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने कहा कि वह पोर्टेज कॉलेज को सीधे तौर पर फर्जी डिग्री देने वाला संस्थान नहीं मानतीं। हालांकि उनका मानना है कि संस्थान ने स्थायी निवास (PR) मिलने की संभावनाओं को लेकर छात्रों के सामने बढ़ा-चढ़ाकर दावे किए हो सकते हैं। जिन लोगों के पास वैध इंटरनेशनल स्टूडेंट स्टेटस, वर्क परमिट या स्थायी निवास (PR) नहीं होगा, उन्हें कनाडा के आव्रजन नियमों के अनुसार देश छोड़ना होगा।
छात्रों ने सरकार से मांगा समाधान
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उन्होंने कनाडा के नियमों के अनुसार पढ़ाई पूरी की है, इसलिए सरकार को उनके मामलों की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो हजारों भारतीय छात्रों का भविष्य और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति गंभीर संकट में पड़ सकती है।





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