Thu, 18 Jun 2026
Post Details

काव्य संकलन "श्रुता"

उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा
आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा

इफ़्तिख़ार नसीम


दीवार ओ दर झुलसते रहे तेज़ धूप में
बादल तमाम शहर से बाहर बरस गया

इफ़्तिख़ार नसीम


बड़ी हसरत से इंसाँ बचपने को याद करता है
ये फल पक कर दोबारा चाहता है ख़ाम हो जाए

नुशूर वाहिदी


मेहंदी लगाने का जो ख़याल आया आप को
सूखे हुए दरख़्त हिना के हरे हुए

हैदर अली आतिश

Views: 56

Comments & Discussions

Be the first to comment on this article!



Latest News

Number of Visitors - 167654