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कनाडा में रहने वाले पंजाबियों और अन्य प्रवासियों के लिए इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटीजनशिप कनाडा (IRCC) ने बिल C-12 के तहत इमिग्रेशन और शरणार्थी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सरकार का कहना है कि इन नए नियमों का उद्देश्य बढ़ते आवेदनों के दबाव को कम करना, प्रशासनिक देरी को समाप्त करना और इमिग्रेशन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को समय पर सुरक्षा और राहत मिल सके।
शरणार्थी दावे के लिए तय की गई नई समय-सीमा
नए नियमों के अनुसार, कनाडा पहुंचने के बाद शरण (Asylum) का दावा निर्धारित समय के भीतर करना अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित अवधि के बाद आवेदन करता है, तो उसका मामला इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड (IRB) के पास नहीं भेजा जाएगा और उसे शरणार्थी प्रक्रिया के लिए अयोग्य माना जा सकता है।
इसके अलावा, जो लोग अमेरिका से कनाडा की सीमा आधिकारिक चेकपोस्ट के अलावा किसी अन्य रास्ते से पार करते हैं, उन्हें 14 दिनों के भीतर शरण का दावा प्रस्तुत करना होगा। तय समय सीमा के बाद किए गए दावों पर विचार नहीं किया जाएगा।
ऑनलाइन और दस्तावेज आधारित प्रक्रिया को मिलेगा बढ़ावा
IRCC ने आवेदन प्रक्रिया को अधिक आधुनिक और तेज बनाने के लिए डिजिटल प्रणाली को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। अब सरकार ऐसे आवेदनों को प्राथमिकता देगी, जिनमें सभी आवश्यक दस्तावेज पूरे हों। इससे लंबित मामलों की संख्या कम करने और निर्णय प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलेगी।
सरकारी विभागों के बीच साझा की जा सकेगी जानकारी
नए प्रावधानों के तहत IRCC को शरणार्थियों और आवेदकों से जुड़ी जानकारी अन्य संघीय और प्रांतीय सरकारी विभागों के साथ साझा करने का कानूनी अधिकार मिल गया है। सरकार का मानना है कि इससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।
वीजा, वर्क परमिट और स्टडी परमिट पर बढ़े सरकार के अधिकार
बिल C-12 के तहत सरकार को जनहित में वीजा, वर्क परमिट और स्टडी परमिट जैसे इमिग्रेशन दस्तावेजों को रद्द करने, निलंबित करने या उनमें बदलाव करने की व्यापक शक्तियां भी दी गई हैं। हालांकि, ऐसे किसी भी फैसले से पहले सरकार को संसद को इसकी जानकारी देनी होगी।
अयोग्य आवेदकों को भी मिलेगी सुरक्षा का अवसर
IRCC ने स्पष्ट किया है कि नए नियमों के कारण जो लोग शरणार्थी प्रक्रिया के लिए अयोग्य घोषित किए जाएंगे, उनके लिए भी प्री-रिमूवल रिस्क असेसमेंट (PRRA) की व्यवस्था जारी रहेगी। इस प्रक्रिया के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसे देश में वापस न भेजा जाए, जहां उसे जान का खतरा, उत्पीड़न या गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ सकता हो।
लंबित मामलों का बोझ कम करने पर फोकस
कनाडा सरकार का मानना है कि पहले शरणार्थी दावों की लंबी समय-सीमा के कारण इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड के पास बड़ी संख्या में मामले लंबित हो गए थे। इससे वास्तविक जरूरतमंदों को भी सुनवाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। नए नियमों के जरिए सरकार शरणार्थी प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।
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