ਨਾਗਰਾ ਫਾਟਕ ਤੋਂ ਰਤਨ ਨਗਰ ਦੇ ਰਸਤੇ ਤੇ ਲਾਈਟਾਂ ਦੋ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਖਰਾਬ ਹੋਈਆਂ ਹਨ : ਰਣਜੀਤ ਕੌਰ ਰਾਣੋ
रोज़ वो ख़्वाब में आते हैं गले मिलने को
मैं जो सोता हूँ तो जाग उठती है क़िस्मत मेरी
जलील मानिकपूरी<...
डूब जाऊँ तो कोई मौज निशाँ तक न बताए
ऐसी नद्दी में उतर जाने को जी चाहता है...
इफ़्तिख़ार आरिफ़
ये होशियार...
मैं रौशनी हूँ तो मेरी पहुँच कहाँ तक है
कभी चराग़ के नीचे बिखर के देखूँगी
अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
अजीब लुत्फ़ था नाद...
इश्क़ में राय बुज़ुर्गों से नहीं ली जाती
आग बुझते हूए चूल्हों से नहीं ली जाती
- मुनव्वर राना
...*मोबाइल*
मोबाइल का जादू है हर दिल में समाया,
दुनिया को मुट्ठी में, जैसे कैद कर लाया।
ज्ञान का भंडार है , खेलो...
वरक़ उलट दिया करता है बे-ख़याली में
वो शख़्स जब मिरा चेहरा किताब होता है
अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा<...
मैं जब भी उस की उदासी से ऊब जाऊँगी
तो यूँ हँसेगा कि मुझ को उदास कर देगा
मेरी तस्वीर बनाने क...
कैसे टुकड़ों में उसे कर लूँ क़ुबूल
जो मिरा सारे का सारा था कभी
शारिक़ कैफ़ी
मैं त...
इकबाल अशहर जी के यह कुछ शेर .. उन्होंने कितनी खूबसूरती से शेरों को अपने शब्दों में पिरोया है । जो की कुछ इस तरह है :-
...कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूत
जिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है
नातिक़ लखनवी
तेरे ख्वाबों में बीती हैं
मेरी रातें ,
और
यादों में कटे हैं दिन ।
जिनमें से कुछ ...
तेरे साथ हैं ,
और कुछ ....
जब तक है डोर हाथ में तब तक का खेल है
देखी तो होंगी तुम ने पतंगें कटी हुई
मुनव्वर राना
बंजारे हैं रिश्तों ...
अज़ल से क़ाएम हैं दोनों अपनी ज़िदों पे 'मोहसिन'
चलेगा पानी मगर किनारा नहीं चलेगा
मोहसिन नक़वी
मुझको रस्ते में मिली जब भी कड़ी धूप कहीं
सर पे छाई है घटा बन के मेरी माँ की दुआ
तरुणा मिश्रा
&...
ख़ुद-कुशी जुर्म भी है सब्र की तौहीन भी है
इस लिए इश्क़ में मर मर के जिया जाता है
Ibrat Siddiki
...पानी में भी चाँद सितारे उग आते हैं
आँख से दिल तक वो ज़रख़ेज़ी हो जाती है
हैदर क़ुरैशी
मोहब्बतों के दिनों की यही ख़राबी है
ये रूठ जाएँ तो फिर लौट कर नहीं आते
वसीम बरेलवी
...
बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमाँ जो बस गए
इंसाँ की शक्ल देखने को हम तरस गए
- कैफ़ी आज़मी
&...