Thu, 30 Jul 2026

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  • Entertainment
  • 14 Mar 2025 09:50pm

होली की शाम

 

शोर धीमा पड़ रहा है,  

रंग अब थककर दीवारों से लग गए हैं,  

गुलाल से सजे चेहरे,  

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  • Entertainment
  • 08 Mar 2025 08:48pm

स्त्री

 

स्त्री …  

नाम में ही एक पूरी कहानी है,  

कभी कोमल हवा, तो कभी तूफानी है।  

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  • Entertainment
  • 07 Mar 2025 08:47am

"वसीम बरेलवी" ग़ज़ल

तिरे ग़म से उभरना चाहता हूँ

मैं अपनी मौत मरना चाहता हूँ

 

धधकती आग है साए में जिस के

पसीना ख़ुश्क करना चाह...

  • Entertainment
  • 03 Mar 2025 08:21pm

सूना आसमान

 

एक दौर था, जब गगन हंसता था,  
बादलों की टोलियाँ खेला करती थीं,  
तारों की महफ़िलें सजी रहती थीं,  
चाँ...

  • Uncategorized
  • 20 Feb 2025 10:34pm

सोचती हूँ लिखूँ ख़ुद पर

 

 

सोचती हूँ लिखूँ ख़ुद पर,  

पर कहाँ से शुरू करूँ?  

बचपन के गलियारों से,  

...
  • Entertainment
  • 19 Feb 2025 11:22pm

काश, कुछ करिश्मा हो जाए

 

सुब्ह जब आए, 
तो खिड़की पे रख जाए , कुछ धूप के सुनहरे टुकड़े …  
हवा चलते-चलते कानों में  
पुराने किस...

  • Entertainment
  • 18 Feb 2025 09:09pm

ये मरना जीना भी शायद

ये मरना जीना भी शायद मजबूरी की दो लहरें हैं

कुछ सोच के मरना चाहा था कुछ सोच के जीना चाहा है

सहर अंसा...

  • Entertainment
  • 13 Feb 2025 09:50pm

वजूद

*वजूद*


वजूद?  
किसका?  
घर की दीवारों का, जो रोज़ नए रंग में रंगी जाती हैं, फिर भी किसी की याद में नहीं ठहरती...

  • Entertainment
  • 12 Feb 2025 08:40pm

इंतज़ार

 

सूरज ढलते ही,  

दिन ने आँचल समेट लिया,  

पर ये शाम,  

अब भी तेरे क़दमों की आह...

  • Entertainment
  • 10 Feb 2025 06:21pm

उम्मीद

 

 

धीमी-धीमी आँच पर, ख्वाब पक रहे थे,  

सर्द रातों में, चाँद तक रहे थे।  

वक़्त की शाख...

  • Entertainment
  • 08 Feb 2025 10:38pm

मां

 

माँ

अब बस थोड़ी दूर हो गई है,  

जैसे सूरज छत पर चमकता हो,  

पर हाथ बढ़ाओ तो छू न ...

  • Entertainment
  • 06 Feb 2025 09:55pm

नारी का सफ़र

 

कोमल हथेलियों में सपनों की लकीर थी,  

आँखों में उजाले की तासीर थी...  

पर जब दुनिया के रं...

  • Entertainment
  • 02 Feb 2025 01:53pm

तू हर इक का है और किसी का नहीं

तू हर इक का है और किसी का नहीं

लोग कहते रहें हमारा चाँद

अतहर नादिर

 

पलट के आ गई ख़ेमे की सम्त प्यास मिरी

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  • Entertainment
  • 01 Feb 2025 11:38pm

बदलता मौसम

 

हवा में ठंडक बढ़ गई है,  

कुछ रिश्ते भी ठिठुरने लगे हैं...  

वो जो धूप-से चमकते थे,  ...

  • Entertainment
  • 28 Jan 2025 11:29pm

मेरा फ़ैसला

 

बचपन से सुना—  

"लड़कियाँ सपने नहीं देखतीं,  

उनका संसार चार दीवारों तक सीमित होता ...

  • Entertainment
  • 26 Jan 2025 08:28am

जज़्बात

 

दिल के कोने में जज़्बात जलते रहे,  
बेवजह, बेसबब सुलगता रहे ।  
कभी हँसी में छुपकर मुस्काए ,  
कभी खा...

  • Entertainment
  • 24 Jan 2025 09:59pm

गहरी सोचें लम्बे दिन और छोटी रातें

छुरी का तीर का तलवार का तो घाव भरा

लगा जो ज़ख़्म ज़बाँ का रहा हमेशा हरा

इस्माइल मेरठी

 

  • Entertainment
  • 15 Jan 2025 11:00pm

अजीब शख़्स था उसको समझाना मुश्किल है

अजीब शख़्स था उस को समझना मुश्किल है

किनार-ए-आब खड़ा था मगर वो प्यासा था

खलील तनवीर

 

  • Entertainment
  • 07 Jan 2025 07:37pm

मैंने बचपन में अधूरा ख्वाब देखा था कोई

मैं ने बचपन में अधूरा ख़्वाब देखा था कोई

आज तक मसरूफ़ हूँ उस ख़्वाब की तकमील में

आलम ख़ुर्शीद

 

हिज्र की र...

  • Entertainment
  • 29 Dec 2024 07:16pm

जो भी चाहो निकाल लो मतलब

जो भी चाहो निकाल लो मतलब

ख़ामुशी गुफ़्तुगू पे भारी है

मसरूर जालंधरी

 

तुम्हें हँसते हुए देखा है जब से

...

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