ਨਾਗਰਾ ਫਾਟਕ ਤੋਂ ਰਤਨ ਨਗਰ ਦੇ ਰਸਤੇ ਤੇ ਲਾਈਟਾਂ ਦੋ ਮਹੀਨੇ ਤੋਂ ਖਰਾਬ ਹੋਈਆਂ ਹਨ : ਰਣਜੀਤ ਕੌਰ ਰਾਣੋ
लोग काँटों से बच के चलते हैं
मैं ने फूलों से ज़ख़्म खाए हैं
अज्ञात
तुम हँसो तो दिन निकले चुप रहो तो रातें हैं&n...
पानी में भी चाँद सितारे उग आते हैं
आँख से दिल तक वो ज़रख़ेज़ी हो जाती है
हैदर क़ुरैशी
उड़ गए सारे परिंदे मौसमों की ...
जब वो साथ होता है
हम अकेले होते हैं
नज़ीर कै़सर
लोग काँटों से बच के चलते हैं
भीड़ तन्हाइयों का मेला है
आदमी आदमी अकेला है
---- सबा अकबराबादी
जो कम-निगाह...
मैं हाथ मिलाऊं तो मिलाने नहीं देता
ये शहर मुझे दोस्त बनाने नहीं देता
मैं डाल के आया हूं गये वक़्त क...
किसी से कोई भी उम्मीद रखना छोड़ कर देखो
तो ये रिश्ता निभाना किस क़दर आसान हो जाए
वसीम बरेलवी
...चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है
मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है।
मुनव्वर राना
...उसे हम पर तो देते हैं मगर उड़ने नहीं देते
हमारी बेटी बुलबुल है मगर पिंजरे में रहती है
रहमान मुसव्व...
*एहसास*
अपनी हालत का
ख़ुद एहसास नहीं मुझ को,
मैं ने औरों से सुना है
कि परेशान हूँ मैं।
हंसते चे...
इतनी सारी यादों के होते भी जब दिल में
वीरानी होती है तो हैरानी होती है
अफ़ज़ल ख़ान
वही फिर मुझे याद आने लगे हैं
जिन्हें भूलने में ज़माने लगे हैं
ख़ुमार बाराबंकवी
दि...
मैं बोलता गया हूँ वो सुनता रहा ख़ामोश
ऐसे भी मेरी हार हुई है कभी कभी
वसीम बरेलवी
त...
ख्वाहिशों का काफिला भी बड़ा अजीब है 'फ़राज़'
अक्सर वहीं से गुज़रता है जहां रास्ता ना हो।
अहमद फ...
कोलकाता में,
अचानक एक दिन
एक चीख ने सनाटे को चीर दिया
नारी के सम्मान पर
एक और जख्म ने वार किया
इंसा...
बे-फ़ैज़ इक चराग़ बताया गया मुझे
सूरज बुझा तो ढूंढ के लाया गया मुझे
उभरा हर एक बार नया फूल बन के मैं<...
मुझे दुश्मन से अपने इश्क़ सा है
मैं तन्हा आदमी की दोस्ती हूँ
बाक़र मेहदी
दोस्ती ...
बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं
कि छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं
इरफ़ान सिद्दीक़ी
बच्चों का सा मिज़ाज है तख़्लीक़-कार का
अपने सिवा किसी को बड़ा मानता नहीं
मतीन नियाज़ी
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